मथुरा, जागरण संवाददाता: सतगुरू और आला फकीर बाबा जय गुरुदेव शुक्रवार रात ब्रंालीन हो गए। उन्होंने रात लगभग 9.30 बजे अपने आश्रम में अंतिम सांस ली। वह 116 वर्ष के थे और पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। बाबा के निधन की खबर सुनकर उनके लाखों अनुयायी शोकाकुल हो गए। यहां आश्रम में बहुत से तो फूट-फूटकर रोने लगे। रात 10.30 बजे हाईवे किनारे स्थित आश्रम में घोषणा की गयी कि बाबा अपने धाम को चले गए। उनका पार्थिव शरीर आश्रम में भक्तों के दर्शनों को सुबह रखा जाएगा। वैसे रात में भी उनके भक्तों का तांता आश्रम स्थित कक्ष में दर्शनों को लगा रहा। अंतिम संस्कार से पहले आश्रम में उनका पार्थिव शरीर तीन दिन के लिए दर्शनार्थ रखा जाएगा। चिकित्सकों के अनुसार बाबा जय गुरुदेव को कफ, फेफड़े में पानी भरने और हार्ट संबंधी दिक्कतें थीं। उनका इलाज कभी स्थानीय तो कभी आगरा, दिल्ली, गुड़गांव और मुंबई के चिकित्सकों ने किया, लेकिन छह मई को उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई थी। डॉक्टरों की सलाह पर बाबा आठ मई को गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराये गये थे। आश्रम पर उपस्थित अनुयायियों के अनुसार, बाबा की इच्छा और डॉक्टरों की सलाह पर वह मेदांता अस्पताल की आइसीयू एंबुलेंस से शुक्रवार दोपहर बाद तीन बजे आश्रम लाए गए थे। यहां उन्हें चार-पांच घंटे वेंटिलेटर पर रखा गया। साथ आए दिल्ली और गुड़गांव के कई विशेषज्ञ डॉक्टर उनके स्वास्थ्य की गहन निगरानी कर रहे थे।
Friday, May 18, 2012
Wednesday, March 14, 2012
दुनिया के सबसे रईस राजनेता
दुनिया के सबसे रईस राजनेता
नई दिल्ली।। अमेरिकी वेबसाइट ' बिजनेस इनसाइडर ' ने दुनिया के सबसे रईस राजनेताओं की लिस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चौथे नंबर पर रखा है। इस लिस्ट में हरियाणा की विधायक और जिंदल समूह की चेयरपर्सन सावित्री जिंदल का नाम भी है। साइट के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष की संपत्ति 2 से 19 अरब डॉलर यानी 10 हजार से 45 हजार करोड़ के बीच हो सकती है।
दरअसल, सबसे पहले यह खबर जर्मनी के अखबार 'डी वेल्ट' में छपी थी। इस अखबार के वर्ल्ड्स लग्जरी गाइड सेक्शन में दुनिया के सबसे रईस 23 नेताओं की लिस्ट छापी गई थी। उसमें भी सोनिया गांधी चौथे स्थान पर हैं। ' बिजनेस इनसाइडर ' ने अपनी लिस्ट में सोर्स के रूप में वर्ल्ड्स लग्जरी गाइड का हवाला दिया है, जबकि सबसे नीचे लिखा गया है कि यह रिपोर्ट OpenSecrets.org, Forbes.com, Bloomberg.com, Wikipedia.org, Guardian.co.uk से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।
इस पर अभी तक कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल नेटवर्किंग साइटों पर काफी चर्चा है। कुछ लोगों ने कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया न आने पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया की अपेक्षा इसलिए की जा रही है, क्योंकि सोनिया गांधी की ओर से घोषित की गई संपत्ति और लिस्ट में बताई गई संपत्ति में जमीन-आसमान का अंतर है। ऐसे में संभावना यह जताई जा रही है कि कांग्रेस पार्टी साइट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
लिस्ट में अहम नाम
1. अब्दुल्लाह बिन अब्दुल अजीज शाह, सऊदी अरब
2. हसनल बोलखेह सुल्तान, ब्रुनेई
3. माइकल ब्लूमबर्ग मेयर, न्यूयॉर्क
4. सोनिया गांधी
6. व्लादीमिर पुतिन
7. सावित्री जिंदल
19. आसिफ अली जरदारी
Saturday, September 10, 2011
Court prod to BPSC on result
Issue Date: Saturday , September 10 , 2011
Court prod to BPSC on result
- HC order to constitute expert committee to review model answer sheets
UMA KANT PRASAD VARMA
Patna, Sept. 9: A single bench of Patna High Court today ordered the Bihar Public Service Commission (BPSC) to constitute a panel of experts to review the question papers and the model answer sheets of the preliminary exam before proceeding to the next level — conducting the mains.
The bench of Justice Ajay Kumar Tripathi issued the order while hearing the petitions filed by 54 candidates challenging the BPSC’s decision to announce the results of the preliminary exam after abruptly deleting eight marks from 150.
Additional advocate-general Lalit Kishore submitted before the court that the commission had no objection to re-examining the question papers and model answer sheets by a fresh panel of experts.
The petitioners had demanded cancellation of the result of the 53rd to 55th Common Combined (Preliminary) Competitive Examination 2011. They also sought re-examination.
Out of 1.35 lakh candidates appearing in the preliminary exams, around 15,000 candidates were declared successful by the commission in the combined (53rd to 55th) civil services examination (prelims).
The bench of Justice Tripathi on August 16 had directed BPSC not to conduct the mains of the civil services examination till petitions demanding fresh examination for the preliminary test were disposed of. The court also posted the matter for hearing on November 14.
An advertisement for BPSC preliminary exam was published on January 1, 2011. It invited applications for 53rd to 55th Common Combined (Preliminary) Competitive Examination 2011. The preliminary exam was conducted on April 17. The result was published on July 16.
Several candidates who failed to make it to the list approached the court on the issue. The petitioners said the commission had illegally deleted eight questions out of 150 asked in the exam and declared results on the basis of 142 questions. The petitioners maintained that they would have automatically qualified in the examination if the results were declared on the basis of 150 questions.
The petitioners claimed that the answer booklets supplied by the commission had several defects. The multiple choices (answers) given against some questions were totally wrong but the commission published the result on the basis of such erroneous questions and answers, they said. They maintained that the act of declaring results on the basis of only 142 questions instead of 150 by the commission was totally arbitrary, illegal and mala fide.
Some aspirants alleged large-scale anomalies in declaration of results and violation of the reservation policy of the state government.
According to Ajay Kumar Gupta, who appeared in the BPSC preliminary test, the question number 91 stated: “Congress passed the Swaraj resolution in the year 1905. The purpose of the resolution was what.” Gupta said: “The correct answer to the above question should have been ‘to serve self-rule’, but the question was removed by the commission, as it considered the question wrong.”
Another question was: “When was Madras Mahajan Sabha established?”
Rajmohan Mitra, who also had appeared in the preliminary test, said: “Though the correct answer was given in the options, it was also marked as a wrong question by the commission.”
BPSC holds combined civil services examination every year. This year, BPSC conducted the 53rd, 54th and 55th examinations for recruitment of officers under the state civil service examinations at a single go.
Thursday, August 25, 2011
संविदा शिक्षकों पर शासन मेहरबान
संविदा शिक्षकों पर शासन मेहरबान
लखनऊ, 23 अगस्त (जाब्यू) : अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को पढ़ाने के लिए संविदा पर नियुक्त शिक्षकों पर शासन मेहरबान है। ऐसे शिक्षकों को कॉलेजों के प्रबंधतंत्र द्वारा कम वेतन के भुगतान की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए शासन ने इस समस्या से निपटने के लिए नया आदेश जारी किया है। नए शासनादेश के मुताबिक अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों से शुल्क के रूप में जो आमदनी होती है, उसे एक ही बैंक के एक ही खाते में रखा जाएगा और हर महीने विभिन्न पाठ्यक्रमों की सकल आय की 75 से 80 फीसदी धनराशि शिक्षकों के वेतन पर खर्च की जाएगी। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए खाते का संचालन कॉलेज के प्रबंधक और प्राचार्य के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा। इस खाते का आवश्यक रूप से ऑडिट कराया जाएगा और प्रबंधतंत्र को हर साल 30 जून तक विश्वविद्यालय व शासन को ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध करानी होगी। शासनादेश में यह भी व्यवस्था की गई है कि यदि संविदा पर नियुक्त शिक्षक का कार्य व आचरण संतोषजनक हो और उसके विरुद्ध कोई अनुशासनिक कार्यवाही नहीं चल रही हो तो प्रबंधतंत्र संबंधित विश्वविद्यालय के अनुमोदन से शिक्षकों की संविदा का नवीनीकरण अपने स्तर से करते रहेंगे। शिक्षक के खिलाफ कोई प्रतिकूल परिस्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति का निर्णय अंतिम होगा। शिक्षकों की संविदा अवधि बढ़ाने के लिए अब तक जो व्यवस्था प्रचलित थी उसके तहत पांच वर्ष की पहली संविदा समाप्त होने पर प्रबंधतंत्र फिर से चयन की कार्यवाही शुरू करने से पहले साफ सुथरी छवि वाले शिक्षकों के नाम पर निश्चित रूप से विचार करेगा और उनकी संविदा का अगले पांच साल के लिए नवीनीकरण किया जाएगा। अब तक प्रचलित व्यवस्था के तहत संविदा के नवीनीकरण के लिए पूर्व में कार्यरत शिक्षकों को साक्षात्कार में शामिल करने या विश्वविद्यालय से उनके नाम अनुमोदित कराने की जरूरत नहीं थी। शासन ने संविदा शिक्षकों को सभी अनुदानित कॉलेजों की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। इन शिक्षकों को रिफ्रेशर/आरियंटेशन कार्यशालाओं में भाग लेने की अनुमति भी प्रदान की गई है। नए शासनादेश में यह भी कहा गया है कि यदि किसी स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में छात्रों की संख्या शून्य हो जाती है तो कॉलेज अपनी रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करेगा। शासन के अनुमोदन के बाद विश्वविद्यालय की अनुमति से ही ऐसे पाठ्यक्रम को बंद किया जा सकता है।
Monday, August 22, 2011
आइएएस मुख्य परीक्षा का कार्यक्रम घोषित
आइएएस मुख्य परीक्षा का कार्यक्रम घोषित
संघ लोक सेवा आयोग ने सोमवार को सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। परीक्षा 29 अक्टूबर से शुरू हो रही है, जोकि 26 नवंबर तक चलेगी। परीक्षा दो पालियों में होगी। पहली पाली का समय 9 से 12 व दूसरी पाली का समय 2 से 5 रखा गया है। पहले दिन 29 अक्टूबर को सामान्य अध्ययन का पेपर होगा। 30 अक्टूबर को पहली पाली में निबंध और दूसरी पाली में अंग्रेजी का पेपर होगा। 31 अक्टूबर को पहली पाली में हिंदी सहित भारतीय भाषाओं का पेपर होगा। 2 नवंबर को राजनीति विज्ञान व अंतरराष्ट्रीय संबंध। इसके अलावा लोक प्रशासन का पेपर होगा। 3 नवंबर को भूगोल, 4 को इतिहास, 5 को सामाजिक विज्ञान व एंथ्रोपोलॉजी, 9 नवंबर को साहित्य का पेपर, 11 नवंबर को दर्शनशास्त्र का पेपर होगा। इसके अलावा 12 नवंबर को साइकोलॉजी, 14 नवंबर को सिविल, इलेक्टि्रकल, मैकेनिकल इंजीनियरिंग का व मेडिकल साइंस का पेपर होगा। 15 नवंबर को जंतु विज्ञान, 16 नवंबर को कामर्स व एकाउंटेंसी एवं मैनेजमेंट का पेपर होगा। 17 नवंबर को अर्थशास्त्र, 18 को लॉ, 19 को गणित व सांख्यिकी, 21 को कृषि एवं पशुधन विकास व चिकित्सा विज्ञान, 22 को बॉटनी, 23 को भौतिक विज्ञान, 25 को रसायन विज्ञान व 26 नवंबर को जियोलॉजी का पेपर होगा।
Tuesday, July 26, 2011
CENTRAL TEACHER ELIGIBILITY TEST - JUNE 2011 Result
Thursday, June 9, 2011
दुनिया के सबसे महंगे शहर
दुनिया के सबसे महंगे शहरों की लिस्ट में सबसे ऊपर जापान की राजधानी टोक्यो का नाम है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ईसीए इंटरनेशनल द्वारा बेहद खर्चीले शहरों की लिस्ट में टोक्यो को यह खिताब दिया गया है। इस लिस्ट में भारत के भी कई शहरों का नाम है। लिस्ट में दिल्ली को 38वें पायदान पर रखा गया है जबकी मुंबई 43वें स्थान पर है। वहीं बेंगलूर 46वें, चेन्नई 47वें, हैदराबाद 48वें, पुणे 50वें और कोलकाता को भी 51वें स्थान पर जगह दी गई है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन के लिये पात्रता की आयु सीमा ६५ वर्ष से घटाकर ६० वर्ष करने के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी। सूचना प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी ने यहां बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन ङ्क्षसह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इसके साथ ही ८० वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिये इस पेंशन की राशि २०० रूपये से बढ़ाकर ५०० रूपये करने के प्रस्ताव का भी अनुमोदन
Thursday, June 2, 2011
घातक ई-कोलाई ने 20 जानें लीं
घातक ई-कोलाई ने 20 जानें लीं
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घातक बैक्टीरिया ई-कोलाई के संक्रमण की वजह से यूरोप में अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 16 सौ से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं.
ख़बरें हैं कि अब ये अमरीका तक फैल गया है.
अमरीकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि हाल ही में जर्मनी के प्रवास से लौटे दो लोगों में ई-कोलाई बैक्टीरिया का पता चला है.
वैज्ञानिक अभी भी इसके स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.
फैलाव
ई-कोलाई की वजह से ज़्यादातर मौतें जर्मनी में ही हुई हैं.
वहाँ अब तक ख़ूनी दस्त के एक हज़ार से अधिक मामलों का पता चला है जबकि 470 लोग ख़ून और गुर्दे से संबंधिक बीमारी से ग्रस्त हैं.
वैसे स्वीडन में भी एक व्यक्ति के मौत की ख़बरें हैं.
ब्रिटेन में कम से कम सात लोगों के इससे पीड़ित हैं जिनमें से तीन ब्रिटिश नागरिक हैं. माना जा रहा है कि इन सभी को ये संक्रमण जर्मनी में ही हुआ है. इसके अलावा स्वीडन, डेनमार्क, नीदरलैंड्स, और स्पेन में भी इस बैक्टीरिया से संक्रमण का पता चला है. इससे पहले कहा जा रहा था कि इस बैक्टीरिया का फैलाव स्पेन से हुआ है लेकिन इसके कोई सबूत नहीं मिले हैं.
इसके बाद स्पेन ने कहा है कि सब्ज़ियों की बिक्री रुकने की वजह से नुक़सान के लिए यूरोपीय संघ से भरपाई का दावा कर सकता है.
ई-कोलाई से मौतों की ख़बर के बाद रूस ने यूरोपीय संघ के देशों में पैदा हुई ताज़ा सब्ज़ियों के आयात पर रोक लगा दी है.
रूस यूरोपीय संघ के लिए सब्ज़ियों का सबसे बड़ा बाज़ार है.
रूस के इस फ़ैसले के बाद यूरोपीय संघ ने रूस से आयात पर लगी रोक को हटाने की अपील की है.
इसकी वजह से कई बार लोगों का गुर्दा भी काम करना बंद कर देता है और संक्रमित व्यक्ति की मौत हो जाती है.
बैक्टीरिया का नया रूप
इस बीच वैज्ञानिकों ने कहा है कि जर्मनी में जिस ई-कोलाई बैक्टीरिया का पता चला है वह इसकी नई प्रजाति है.
उनका कहना है कि इसकी वजह से घातक ख़ून और गुर्दे को प्रभावित करने वाली बीमारी हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम (एचयूएस) हो सकती है.
डॉक्टरों का कहना है कि हो सकता है कि बैक्टीरिया की इस नई प्रजाति में ज़्यादा लोगों को प्रभावित करने की क्षमता विकसित हो गई हो.
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ई-कोलाई के इस घातक रूप का आज तक पता नहीं था.
वैज्ञानिकों का कहना है कि वैसे तो ई-कोलाई एक तरह का एक सामान्य बैक्टीरिया है जो इंसानों और मवेशियों के पेट में हमेशा रहता है.
इसके ज़्यादातर रूप हानिरहित हैं,लेकिन ई-कोलाई के कुछ बैक्टीरिया घातक हैं और वह पेट में मरोड़ और दस्त जैसे लक्षण पैदा करते हैं.
Monday, May 30, 2011
फिर आंदोलन करेंगे हजारे
आरपी सिंह
नई दिल्ली। जन लोकपाल विधेयक का प्रारुप बनाने के लिए बनी समिति में जबर्दस्त मतभेद उभर कर सामने आए हैं। सरकार ने समाज के सदस्यों की तरफ से दिए गए लगभग सभी सुझावों को ठुकरा दिया है। समाज के सदस्यों ने चेतावनी भरे लहेजे में कहा कि यदि अगली बैठक में सरकार के रुख में बदलाव नहीं आता तथा सरकार मुख्य मुद्दों पर आम राय नहीं बनाती तो वह इस समिति से हट जाएंगे। एक निजी चैनल से वार्ता के दौरान समिति में समाज के तरफ से शामिल सदस्य अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि सरकार का रुख काफी निराशाजनक है। समिति की बैठकों में सरकार की तरफ से कहा जा रहा कि लोकपाल के दायरे में प्रधाननमंत्री, उच्च न्यायपालिका, संसद के अंदर सांसदो आचरण तथा नौकरशाही में भी सचिव स्तर के नीचे के अधिकारियों को नहीं लाया जा सकता। इस संबंध में केजरीवाल का कहना है कि यदि इन सबको लोकपाल के दायरे से बाहर ही रखना है तो फिर लोकपाल बिधेयक का मतलब ही क्या रह जाएगा? समिति के एक अन्य सदस्य व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि मंत्रियों ने समिति की बैठक में अभी तक निर्णायक रूप से कुछ भी नहीं कहा है, लेकिन उनकी राय थी कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाना ठीक नहीं होगा। मैं याद दिला दूं कि सरकार द्वारा बनाए गए प्रारुप में भी प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखा गया है। इसके बाद भी सरकार की तरफ से शामिल सदस्यों का यही कहना है कि इस बारे में उन्हें विचार करना होगा, एक्सपर्ट्स की राय लेनी होगी। इन सब को देखते हुए अगली बैठक अहम होगी। समिति की अगली बैठक 6 जून को होनी तय है। मालूम हो कि लोकपाल विधेयक का प्रारुप तैयार कर रही समिति की सोमवार को हुई बैठक में कुछ भी सार्थक नतीजा सामने नहीं आया। सरकार ने समाज की तरफ से आ रहे उस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें लोकपाल के कानूनी दायरे में प्रधानमंत्री को भी लाने की बात कही गई है। ड्राफ्ट समिति के मुताबिक सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि लोकपाल विधेयक का प्रारुप जून तक तैयार नहीं हो पाएगा। यानी 15 अगस्त तक बिल पारित किए जाने की अन्ना हजारे की मांग को भी सरकार ने खारिज कर दी। इस बारे में हजारे पहले ही कह चुके हैं कि यदि 15 अगस्त तक लोकपाल बिल पास नहीं हुआ तो वह फिर आंदोलन करेंगे।
By- Daily Hindi News Portal :: Janadesh :- Daily hindi news website,Political news and analysis
Wednesday, May 18, 2011
समाचार
कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण विजेता निशानेबाज अन्नु राज सिंह ने अमेरिका के फोर्ट बेनिंग में चल रहे आईएसएसएफ विश्व कप में एयर पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक जीतने के साथ 2012 में होने वाले लंदन ओलिंपिक के लिए कोटा स्थान हासिल कर लिया।
Saturday, May 14, 2011
समाचार
बीसीसीआई ने महान बल्लेबाज सचिन तेंडुलकर को वर्ष -2010 के सर्वश्रेष्ठ भारतीय क्रिकेटर के लिए पॉली उमरीगर ट्रॉफी देने का फैसला किया है। तेंडुलकर को यहां 31 मई को चौथे वार्षिक बीसीसीआई पुरस्कारों के दौरान यह ट्रॉफी दी जाएगी। इस समारोह में 28 साल बाद वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया को भी सम्मानित किया जाएगा।
Wednesday, April 20, 2011
PSLV-C16 puts 3 satellites in orbit
PSLV-C16 puts 3 satellites in orbit
T.S. Subramanian
The Hindu FLAWLESS FLIGHT: PSLV-C16 lifts off majestically from the Satish Dhawan Space Centre in Sriharikota on Wednesday. Photo: M. Vedhan
PSLV-C14 launches Oceansat-2 satellite
NEWS
PSLV notches up another success Resourcesat-2 will beam back huge data on resources Singapore delighted at ISRO's launch of X-Sat ISRO to build orbiter for NASA The long road to cryogenic technology Rs. 378-cr. aid for GPS-aided navigation system Moving on after the GSLV failure ResourceSat-2 launch scheduled for April 20
TOPICS
science and technology space programme
technology (general) rocketrySuccess comes after last year's GSLV failures
It was “sweet seventeen” for the Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) on Wednesday, with the PSLV-C16 scoring a spectacular success by putting three satellites into orbit with precision.
It was the PSLV's 17th consecutive successful mission out of the 18 launches from Sriharikota. At the end of 18 minutes of “a delightful” flawless flight, the fourth stage of the rocket shot India's Resourcesat-2 into its orbit. About 40 seconds later, the fourth stage bulleted again the Youthsat and the X-sat into their orbits. The accuracy was such that the Resourcesat-2 reached an orbit at an altitude of 822.9 km against the targeted 822 km.
The mission lifted the veil of despondency that had fallen over the Indian Space Research Organisation (ISRO) after the failure of the GSLV-D3 with an indigenous cryogenic stage in April last year and of the GSLV-F06 with a Russian cryogenic engine in December. This year, the ISRO was hit by allegations over the S-band spectrum allocation to a private company.
ISRO Chairman K. Radhakrishnan called the mission “a grand success” because the satellites reached their orbits with great precision. It was “a global mission,” he said, because the Resourcesat-2's remote-sensing images would be used by countries across the world.
Director of the Liquid Propulsion Systems Centre of ISRO S. Ramakrishnan described the success as “a sweet seventeen.”
Director of Vikram Sarabhai Space Centre in Thiruvananthapuram P.S. Veeraraghavan said the mission's success had established the PSLV “as the most reliable and cost-effective rocket in the world.” Everything went right with the mission, and “as far as the orbits were concerned, the satellites hit the bullseye,” he added.
The 54-hour countdown progressed without any hitch. At 10.12 a.m., the PSLV-C16 roared off from the first launch pad, climbing steadily. The rocket rode on towers of flame, tracing a parabolic path across a clear sky. One could see with naked eyes the separation of the first stage. The four stages and the strap-on booster motors ignited on time and fell into the Bay of Bengal. The rocket also performed “a dog-leg manoeuvre,” skirting the Sri Lankan territory.
Mission Director P. Kunhikrishnan praised “the excellent performance” of the rocket's four stages and their sub-systems. It was “a reassurance to the nation' from the ISRO that the faith put in the space agency was justified.
The Hindu : News / National : PSLV-C16 puts 3 satellites in orbit
Friday, April 8, 2011
Salient features of Jan Lokpal Bill
The Jan Lokpal Bill (Citizen's ombudsman Bill) is a draft anti-corruption bill that would pave the way for a Jan Lokpal, an independent body like the Election Commission, which would have the power to prosecute politicians and bureaucrats without government permission.
The bill has been drafted by Shanti Bhushan, former IPS Kiran Bedi, Justice N. Santosh Hegde, renowned advocate Prashant Bhushan, former chief election commissioner J. M. Lyngdoh in consultation with the leaders of the India Against Corruption movement and the civil society. The bill proposes institution of the office of Lokpal (Ombudsman) at center and Lok Ayukta at state level. Jan Lokpal Bill is designed to create an effective anti-corruption and grievance redressal systems at centre and to assure that effective deterrent is created against corruption and to provide effective protection to whistleblowers.
The Lokpal Bill drafted by the government is pending to be passed in the Rajya Sabha since 42 years.The first Lokpal Bill was passed in the 4th Lok Sabha in 1969 but could not get through in Rajya Sabha, subsequently, Lokpal bills were introduced in 1971, 1977, 1985, 1989, 1996, 1998, 2001, 2005 and in 2008, yet they were never passed and its pending.
1. An institution called LOKPAL at the centre and LOKAYUKTA in each state will be set up
2. Like Supreme Court and Election Commission, they will be completely independent of the governments. No minister or bureaucrat will be able to influence their investigations.
3. Cases against corrupt people will not linger on for years anymore: Investigations in any case will have to be completed in one year. Trial should be completed in next one year so that the corrupt politician, officer or judge is sent to jail within two years.
4. The loss that a corrupt person caused to the government will be recovered at the time of conviction.
5. How will it help a common citizen: If any work of any citizen is not done in prescribed time in any government office, Lokpal will impose financial penalty on guilty officers, which will be given as compensation to the complainant.
6. So, you could approach Lokpal if your ration card or passport or voter card is not being made or if police is not registering your case or any other work is not being done in prescribed time. Lokpal will have to get it done in a month’s time. You could also report any case of corruption to Lokpal like ration being siphoned off, poor quality roads been constructed or panchayat funds being siphoned off. Lokpal will have to complete its investigations in a year, trial will be over in next one year and the guilty will go to jail within two years.
7. But won’t the government appoint corrupt and weak people as Lokpal members? That won’t be possible because its members will be selected by judges, citizens and constitutional authorities and not by politicians, through a completely transparent and participatory process.
8. What if some officer in Lokpal becomes corrupt? The entire functioning of Lokpal/ Lokayukta will be completely transparent. Any complaint against any officer of Lokpal shall be investigated and the officer dismissed within two months.
9. What will happen to existing anti-corruption agencies? CVC, departmental vigilance and anti-corruption branch of CBI will be merged into Lokpal. Lokpal will have complete powers and machinery to independently investigate and prosecute any officer, judge or politician.
10. It will be the duty of the Lokpal to provide protection to those who are being victimized for raising their voice against corruption.
Tuesday, April 5, 2011
Friday, November 26, 2010
एशियाई खेलों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
भारत के लिए शुक्रवार इन एशियाई खेलों का सबसे स्वर्णिम दिन रहा जबकि उसके एथलीट्स ने चार स्वर्ण पदक जीतकर भारत को पदक तालिका में छठे स्थान पर पहुँचा दिया.
कुल पदकों के हिसाब से ये भारत का आज तक एशियाई खेलों में सबसे अच्छा प्रदर्शन है.
सबसे पहला स्वर्ण पदक आया कबड्डी से जहाँ पहले महिलाओं ने थाईलैंड को 14 के मुक़ाबले 28 अंकों से हरा दिया.
पुरुषों के वर्ग में कबड्डी के 1990 में एशियाड में शामिल किए जाने के बाद से भारत आज तक कभी स्वर्ण हारा ही नहीं और एक बार फिर वही हुआ जबकि भारत ने ईरान को 37-20 के स्कोर से हराकर दिन का दूसरा स्वर्ण पदक जीता.
एथलेटिक्स एक बार फिर भारत के लिए पदक लाया.
सबसे पहले महिलाओं की पाँच हजा़र मीटर की रेस में प्रीजा श्रीधरन और कविता राउत देश का प्रतिनिधित्व कर रहीं थीं.
उन्होंने 10 हज़ार मीटर रेस में स्वर्ण और रजत जीता था मगर इस रेस में वे रजत और काँस्य जीत सकीं. वैसे उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और भारत का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया.
Thursday, October 21, 2010
देश के पहले लेजर बम की तकनीक विकसित
21 Oct 2010 10:20,
देहरादून. देश के पहले लेजर बम की तकनीक देहरादून स्थित इंस्ट्रूमेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (आईआरडीई) ने विकसित की है। आईआरडीई के वैज्ञानिक और जनसंपर्क अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि इस्टैब्लिशमेंट के विभिन्न प्रकार के अनुसंधानों के आधार पर लेजर बम के लिए तकनीक विकसित की गई। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के तहत टार्गेट पर पहले लेजर डाला जाता है जो उसके पास जाकर चमक पैदा करता है और फिर परावर्तित होक र बम में लगे सिस्टम च्सीकरज् के पास वापस आता है। उसके बाद सीकर उस टार्गेट की सही दिशा निर्धारित करता है जिसके बाद बम का लक्ष्य पर इस्तेमाल किया जाता है। कुमार ने बताया कि बेंगलूर स्थित एयरोनाटिक्स डेवलपमंेट इस्टैब्लिशमेंट (एडीई की देखरेख में देश ने 1000 पाउंड का बम विकसित कर रखा है। इस प्रकार की तकनीक से लक्ष्य को सटीक भेदने में काफी मदद मिलती है। लेजर बम सबसे पहले 1960 में अमेरिका ने विकसित किया था। इसके बाद पूर्व सोवियत संघ, फ्रांस और ब्रिटेन में भी इस प्रकार के बम विकसित किए गए।
लिव-इन में हर महिला को गुजारा भत्ता नहींऱ्सुप्रीम कोर्ट
22 Oct 2010 01:45,
नई दिल्ली.सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लिव-इन संबंधों में रह रही महिला उस समय तक गुजारा भत्ते की हकदार नहीं है, जब तक कि वह कुछ निश्चित मानदंडों को पूरा नहीं करती। यह स्थापित होना चाहिए कि युगल वैधानिक तौर पर विवाह किए बिना पति पत्नी जैसा रह रहा था। जस्टिस मरकडेय काटजू और टीएस ठाकुर की बेंच ने कहा कि ऐसे लिव-इन संबंध के खत्म होने पर महिला गुजारा भत्ते की पात्र नहीं होगी, जो केवल शारीरिक संतुष्टि के लिए बनाए गए थे। उसके मुताबिक कानून में उस महिला के लिए गुजारा भत्ते का कोई प्रावधान नहीं है जो महज शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए संबंध रखती है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ते के लिए दावा कर रही महिला को कोर्ट को यह विश्वास दिलाना होगा कि भले उनकी वैधानिक शादी नहीं हुई।लेकिन वे काफी समय पति-पत्नी की तरह साथ रहे हैं। बेंच ने कहा, च्हमारा मानना है कि सभी लिव-इन संबंधों को विवाह जैसे संबंधों का दर्जा देकर घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण संबंधी कानून 2005 का लाभ नहीं दिया जा सकता।ज् जजों ने कहा कि अगर कोई पुरुष किसी महिला को खर्च के लिए पैसे आदि देता है व उससे शारीरिक संबंध कायम करता है और/या उससे नौकर की तरह काम लेता है।हमारी राय में यह विवाह जैसे रिश्ते नहीं हैं। क्या था मामला ऱ् शीर्ष कोर्ट ने यह फैसला डी वेलुसामी की याचिका पर दिया। परिवार अदालत व मद्रास हाईकोर्ट ने वेलुसामी को महिला डी पत्चैयाम्मल को 500 रुपए गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए थे। वेलुसामी ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि उसका विवाह लक्ष्मी से हुआ है और पत्चैयाम्मल से उसकी शादी नहीं हुई, हालांकि कुछ समय के लिए वह उसके साथ रहा था। शीर्ष कोर्ट ने विवाह अदालत और मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। गुजारा भत्ते के लिए चार शर्ते ऱ् - युगल द्वारा समाज के सामने खुद को पति-पत्नी की तरह पेश होना चाहिए। - उनकी विवाह के लिए तय वैधानिक उम्र होनी चाहिए। - उनका वैधानिक दृष्टि से विवाह के लिए सभी शर्ते पूरा करना जरूरी है। - वे स्वेच्छा से साथ रहे हों और एक अच्छे खासे समय के लिए उन्होंने दुनिया के सामने खुद को दंपती जैसा दिखाया हो। गुजारा भत्ते के लिए चार शर्ते >युगल द्वारा समाज के सामने खुद को पति-पत्नी की तरह पेश होना चाहिए। >उनकी विवाह के लिए तय वैधानिक उम्र होनी चाहिए। >उनका वैधानिक दृष्टि से विवाह के लिए सभी शर्ते पूरा करना जरूरी है। >वे स्वेच्छा से साथ रहे हों और एक अच्छे खासे समय के लिए उन्होंने दुनिया के सामने खुद को दंपती जैसा दिखाया हो।